Friday, 30 August 2019

माँ

जब कुछ भी समझ नही आता ना जिंदगी मे
खुद को बोहोत अकेला और बेबस जब लगता है
तो बस माँ को याद कर लिया करती हू
उनकी तरह अपना हाथ सर पे फेर लिया करती हु
खुद ही अपने गालो को सहला लिया करती हु
और नम आंखो से हंस के बस माँ को पुकार लिया करती हु
न जाने कैसे उसी वक्त माँ का फोन आ जाता है
और वो बस आवाज सुन के सब जान जाती
ना ही कुछ बताना पडता ना ही समझाना
मानो वो सब कुछ बस जानती है
कभी बाते समझाती तो
कभी हिम्मत न हारने को कहती
इधर उधर की बाते करके मन को भटकाती
और किसी ना किसी तरीके से
मेरे चहरे पर मुस्कान ले ही आती
कुछ ना जानकर भी सब सुलझा जाती
साथ ना होकर भी हमेशा साथ रहती
पता नही कैसे कर लेती है ये सब  माँ
तो जब भी कुछ समझ नही आता
बस माँ को याद कर लिया करती हु |

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