जब कुछ भी समझ नही आता ना जिंदगी मे
खुद को बोहोत अकेला और बेबस जब लगता है
तो बस माँ को याद कर लिया करती हू
उनकी तरह अपना हाथ सर पे फेर लिया करती हु
खुद ही अपने गालो को सहला लिया करती हु
और नम आंखो से हंस के बस माँ को पुकार लिया करती हु
न जाने कैसे उसी वक्त माँ का फोन आ जाता है
और वो बस आवाज सुन के सब जान जाती
ना ही कुछ बताना पडता ना ही समझाना
मानो वो सब कुछ बस जानती है
कभी बाते समझाती तो
कभी हिम्मत न हारने को कहती
इधर उधर की बाते करके मन को भटकाती
और किसी ना किसी तरीके से
मेरे चहरे पर मुस्कान ले ही आती
कुछ ना जानकर भी सब सुलझा जाती
साथ ना होकर भी हमेशा साथ रहती
पता नही कैसे कर लेती है ये सब माँ
तो जब भी कुछ समझ नही आता
बस माँ को याद कर लिया करती हु |
खुद को बोहोत अकेला और बेबस जब लगता है
तो बस माँ को याद कर लिया करती हू
उनकी तरह अपना हाथ सर पे फेर लिया करती हु
खुद ही अपने गालो को सहला लिया करती हु
और नम आंखो से हंस के बस माँ को पुकार लिया करती हु
न जाने कैसे उसी वक्त माँ का फोन आ जाता है
और वो बस आवाज सुन के सब जान जाती
ना ही कुछ बताना पडता ना ही समझाना
मानो वो सब कुछ बस जानती है
कभी बाते समझाती तो
कभी हिम्मत न हारने को कहती
इधर उधर की बाते करके मन को भटकाती
और किसी ना किसी तरीके से
मेरे चहरे पर मुस्कान ले ही आती
कुछ ना जानकर भी सब सुलझा जाती
साथ ना होकर भी हमेशा साथ रहती
पता नही कैसे कर लेती है ये सब माँ
तो जब भी कुछ समझ नही आता
बस माँ को याद कर लिया करती हु |